सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक प्रमुख लोकनृत्य है। यह नृत्य विशेष रूप से दीपावली और फसल कटाई के बाद किया जाता है। सुआ शब्द का अर्थ तोता होता है, जिसे इस नृत्य में प्रेम, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
सुआ नृत्य में महिलाएँ गोल घेरा बनाकर नाचती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। इन गीतों में सामाजिक जीवन, पारिवारिक रिश्ते और प्रकृति से जुड़ी भावनाएँ दिखाई देती हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि महिलाओं की सामूहिक अभिव्यक्ति का माध्यम है।
आज भी ग्रामीण अंचलों में सुआ नृत्य पूरी आस्था और उत्साह के साथ किया जाता है। सांस्कृतिक मंचों पर इसे बढ़ावा देने से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएँ जीवित बनी हुई हैं।

