Category: भिलाई
छत्तीसगढ़ी लोककथाएँ – पीढ़ियों की सीख
छत्तीसगढ़ी लोककथाएँ राज्य की मौखिक परंपरा का अहम हिस्सा हैं। ये कहानियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही हैं और इनमें जीवन के मूल्य, नैतिकता और समाज की झलक मिलती है। इन लोककथाओं में राजा, किसान, जानवर और प्रकृति सभी पात्र के रूप में सामने आते हैं। इनके माध्यम से बच्चों को संस्कार और जीवन…
राजिम कुंभ – आस्था का त्रिवेणी संगम
राजिम कुंभ – आस्था का त्रिवेणी संगम राजिम कुंभ छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक मेला है, जो महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर आयोजित होता है। इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहा जाता है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं।इस मेले में साधु-संतों के प्रवचन, धार्मिक…
लाल भाजी – सेहत और स्वाद का संगम
लाल भाजी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पत्तेदार सब्जी है, जो आयरन और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह खासकर ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से खाई जाती है। इसे चावल और दाल के साथ परोसा जाता है। लाल भाजी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि यह खून की कमी को दूर करने में भी सहायक…
पोला पर्व – पशुधन और किसान संस्कृति का उत्सव
पोला पर्व – पशुधन और किसान संस्कृति का उत्सवपोला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख कृषि पर्व है, जिसे भादो अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से किसानों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन बैलों की पूजा की जाती है, जिन्हें किसान अपने परिवार का सदस्य मानते हैं।पोला पर्व के…
चीला – छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय नाश्ता
चीला छत्तीसगढ़ का अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक नाश्ता है। यह चावल या चने के आटे से बनाया जाता है और इसे सब्जी या चटनी के साथ खाया जाता है। चीला बनाने में कम तेल का प्रयोग होता है, जिससे यह सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह हर उम्र के लोगों द्वारा पसंद किया…

