करमा नृत्य

– प्रकृति पूजा की परंपराकरमा नृत्य छत्तीसगढ़ और झारखंड क्षेत्र की जनजातियों द्वारा किया जाने वाला प्रमुख लोकनृत्य है। यह नृत्य करमा देवता की पूजा से जुड़ा हुआ है, जिन्हें प्रकृति और फसलों का रक्षक माना जाता है।यह नृत्य विशेष रूप से भादो महीने में किया जाता है। युवक-युवतियाँ गोल घेरा बनाकर नाचते हैं और…

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कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

– प्रकृति की गोद में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर जिले में स्थित है और अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान घने जंगलों, गुफाओं और झरनों से भरपूर है। यहाँ कुटुमसर और कैलाश गुफा विशेष आकर्षण हैं।यह क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति शोधकर्ताओं के लिए आदर्श स्थान है। यहाँ हिरण, भालू और…

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डोंगरगढ़ – आस्था और पर्यटन का संगम

डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जो राजनांदगांव जिले में स्थित है। यह स्थान मां बम्लेश्वरी देवी के प्रसिद्ध मंदिर के लिए जाना जाता है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।मां बम्लेश्वरी मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ और रोपवे दोनों…

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राउत नाचा – सामूहिक उत्सव की परंपरा

राउत नाचा – सामूहिक उत्सव की परंपरा राउत नाचा छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकनृत्य है, जिसे मुख्य रूप से यादव समाज द्वारा दीपावली के अवसर पर किया जाता है। यह नृत्य भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। राउत नाचा में नर्तक पारंपरिक वेशभूषा पहनकर समूह में नृत्य करते हैं। ढोल, मांदर और…

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सुआ नृत्य – छत्तीसगढ़ की महिलाओं की लोक अभिव्यक्ति

सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक प्रमुख लोकनृत्य है। यह नृत्य विशेष रूप से दीपावली और फसल कटाई के बाद किया जाता है। सुआ शब्द का अर्थ तोता होता है, जिसे इस नृत्य में प्रेम, सौभाग्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। सुआ नृत्य में महिलाएँ गोल घेरा बनाकर नाचती…

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सिरपुर – छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर

सिरपुर महासमुंद जिले में स्थित एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान बौद्ध, जैन और हिंदू संस्कृति का केंद्र रहा है। यहाँ स्थित लक्ष्मण मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर में खुदाई के दौरान कई प्राचीन मूर्तियाँ, मठ और अवशेष मिले हैं, जो इसके गौरवशाली इतिहास की कहानी कहते हैं। यह स्थान…

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बोरे-बासी – छत्तीसगढ़ का पारंपरिक सुपरफूड

बोरे-बासी छत्तीसगढ़ का पारंपरिक भोजन है, जिसे खासकर ग्रामीण और श्रमिक वर्ग द्वारा खाया जाता है। यह बासी चावल और पानी से बनता है और गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देता है। आज के समय में जब लोग हेल्दी फूड की तलाश कर रहे हैं, तब बोरे-बासी को सुपरफूड के रूप में पहचाना…

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पंथी नृत्य – सतनाम पंथ की सांस्कृतिक पहचान

पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोकनृत्य है, जो सतनाम पंथ से जुड़ा हुआ है। यह नृत्य मुख्य रूप से गुरु घासीदास जी के विचारों पर आधारित है और सामाजिक समानता, सत्य और भाईचारे का संदेश देता है। पंथी नृत्य में नर्तक सफेद वस्त्र पहनते हैं और तेज ताल पर ऊर्जावान नृत्य करते हैं। इसकी…

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बस्तर दशहरा – 75 दिनों तक चलने वाला अनोखा पर्व

बस्तर दशहरा पूरे भारत में अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्व लगभग 75 दिनों तक चलता है और देवी दंतेश्वरी को समर्पित होता है। इस दशहरे में न तो रावण दहन होता है और न ही रामलीला का मंचन, बल्कि यहाँ आदिवासी आस्था और परंपरा केंद्र में रहती है। बस्तर दशहरा की…

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चित्रकोट जलप्रपात – छत्तीसगढ़ का नियाग्रा

चित्रकोट जलप्रपात छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित है और इसे राज्य का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माना जाता है। यह जलप्रपात इंद्रावती नदी पर बना हुआ है और अपनी चौड़ाई और भव्यता के कारण इसे “छत्तीसगढ़ का नियाग्रा” कहा जाता है। मानसून के समय जब नदी उफान पर होती है, तब चित्रकोट का दृश्य…

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