पांडातराई महाविद्यालय में हिन्दी विभाग द्वारा एक दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया

अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय पाण्डातराई, जिला कबीरधाम में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई क्यू ए सी) के तत्वावधान में हिन्दी विभाग द्वारा एक दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य विषय “प्रश्नों की समझ” रहा, जो विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी एवं प्रासंगिक है।
कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. लाला प्रसाद शर्मा (प्राध्यापक, हिन्दी, बद्री प्रसाद लोधी स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय, आरंग, रायपुर) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए विद्यार्थियों को प्रश्नों की वास्तविक समझ विकसित करने हेतु विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि परीक्षा में सफलता केवल ज्ञान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रश्नों को सही ढंग से समझना और उसी अनुरूप उत्तर प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्रों में प्रयुक्त विभिन्न निर्देशात्मक शब्द जैसे — वर्णन करें, लेख लिखें, निबंध लिखें, व्याख्या करें, प्रकाश डालें, उल्लेख करें, विवेचना करें, टिप्पणी करें, विश्लेषण करें, आलोचना करें, समालोचना करें, समीक्षा करें, मूल्यांकन करें — सभी का अर्थ एक समान नहीं होता, बल्कि प्रत्येक शब्द की अपनी विशिष्टता, उद्देश्य एवं उत्तर लेखन की अलग शैली होती है। उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि “वर्णन” में तथ्यात्मक प्रस्तुति होती है, “विश्लेषण” में गहराई से कारण-परिणाम की चर्चा होती है, “आलोचना” में गुण-दोषों का संतुलित विवेचन होता है तथा “मूल्यांकन” में निष्कर्षात्मक निर्णय प्रस्तुत किया जाता है।
इस अवसर पर आयोजन समिति के कार्यशाला के संयोजक डॉ. द्वारिका प्रसाद कन्द्रवंशी सह संयोजक अतिथि व्याख्याता बुद्धदेव सदस्य डॉ. राज कुमार वर्मा, श्री सूचीगन सिंह धुर्वे, श्री अजय कुमार, श्री जागेश्वर वर्मा, डॉ. गजानंद साहू, श्री कामता प्रसाद वन्तुवंशी, डॉ. गोविन्द सिंह ठाकुर एवं श्री अजय कुमार शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. लखन कुमार तिवारी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं, बल्कि विषय की गहन समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी बनाते हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण के लिए तैयार करते हैं।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विषय विशेषज्ञ से विभिन्न प्रश्न पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। संवादात्मक शैली में आयोजित इस सत्र ने विद्यार्थियों को न केवल प्रश्नों की बारीकियों को समझने में सहायता प्रदान की, बल्कि उन्हें प्रभावी उत्तर लेखन की तकनीकों से भी परिचित कराया।

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